सासाराम, मार्च 1 -- डेहरी, एक संवाददाता। सरसों के फूल का खिलना व पछुआ हवा की सरसराहट फागुन का स्पष्ट संकेत देती है। इस माह में रंग, अबीर के साथ गांवों में पारंपरिक फगुआ, होली गीत की धूम मचती थी। किंतु अब फाग का राग शायद ही कहीं सुनाई पड़ता है। ढोल की थाप व मंजीरे की खनक सुन ग्रामीण मस्त हो जाते थे।
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