बोकारो, जून 30 -- कसमार । झारखंड राज्य के गठन को 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं। अलग राज्य बनने के पीछे सपना था कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े आदिवासी एवं वंचित समुदायों के जीवन में बदलाव आएगा, लेकिन आज भी कई गांवों की हकीकत इस सपने से कोसों दूर नजर आती है। यह भी पढ़ें- वृद्धावस्था पेंशन की आस में पथरा गईं सुकूरमनी और लोबिन हेंब्रम की आंखेंबुजुर्गों की स्थिति बोकारो जिले के कसमार प्रखंड की गर्री पंचायत अंतर्गत तेलमुंगा गांव के तिलयगजार टोला में रहने वाले आदिवासी परिवारों की स्थिति इसकी मार्मिक तस्वीर पेश करती है। इस टोले के बुजुर्ग लोबिन हेंब्रम उम्र और बीमारी दोनों से जूझ रहे हैं। पैर में लकवा होने के कारण वे चलने-फिरने में असमर्थ हैं। उनकी पत्नी सुकूरमनी देवी भी वृद्धावस्था की दहलीज पर हैं, लेकिन विडंबना यह है कि दोनों को आज तक वृद्धावस्था पेंश...