फतेहपुर, जुलाई 28 -- फतेहपुर। दोआबा में कुपोषित बच्चों की पहचान और समय पर उपचार की व्यवस्था सवालों के घेरे में है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्थानों पर कुपोषित बच्चों का चिन्हांकन अप्रशिक्षित कर्मियों के भरोसे होने के कारण जरूरतमंद बच्चों की सही पहचान नहीं हो पा रही है। इसका असर रेफरल व्यवस्था पर भी पड़ रहा है, जिससे कुपोषित बच्चे समय पर पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 45 हजार बच्चे कुपोषित हैं, जबकि सात हजार से अधिक बच्चे अति कुपोषित श्रेणी में शामिल हैं। इसके बावजूद गांवों से गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों का रेफरल अपेक्षित संख्या में नहीं हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि स्क्रीनिंग और रेफरल व्यवस्था मजबूत होने पर अधिक से अधिक बच्चों को समय पर उपचार मिल सकेगा। जिला अस्प...