देहरादून, मार्च 15 -- राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग की ओर से शनिवार को एक दिवसीय सीएमई का आयोजन किया गया। 'अपराध स्थल से पोस्टमार्टम और अदालत तक फॉरेंसिक साक्ष्य' विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस, डॉक्टरों और विधि विशेषज्ञों के बीच तालमेल को मजबूत करना था। मुख्य अतिथि पूर्व पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि अपराधियों को सजा दिलाने के लिए वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका सबसे अहम है। विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. नीरज कुमार ने बताया कि कई बार व्यावहारिक चुनौतियों के कारण विशेषज्ञता के बावजूद न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्य कमजोर पड़ जाते हैं, जिसे आपसी समन्वय से सुधारा जा सकता है। आईजी एसटीएफ नीलेश आनंद भरने ने अपराध स्थल के संरक्षण और साक्ष्यों के दूषित होने से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की। डॉ. नीरज...