प्रयागराज, अप्रैल 30 -- Prayagraj News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि अपमान की मंशा के बिना किसी को जाति से बुलाना एससी/एसटी एक्ट का अपराध नहीं है। ऐसा केस जारी रखना न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में आरोप में एससी/एसटी एक्ट के अपराध के आवश्यक तत्व मौजूद नहीं है। अभियोजन का दायित्व है कि प्रथमदृष्टया साक्ष्य से अपराध होना साबित करे। इसी के साथ कोर्ट ने याची के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। साथ ही कहा कि मारपीट गाली-गलौज के आरोप में मुकदमा चलेगा। यह आदेश न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह ने अमय पांडेय व तीन अन्य की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दिया है। याचियों की ओर से अधिवक्ता गणेश शंकर श्रीवास्तव व अश्वनी कुमार ने अपनी बहस में कहा का कि मामले की एफआईआर अज्ञात के खिलाफ द...