नई दिल्ली, नवम्बर 28 -- अश्विनी महापात्रा, प्रोफेसर, जेएनयू इस साल 29 नवंबर का दिन खास है। यह वह तारीख है, जब 1977 में संयुक्त राष्ट्र ने फलस्तीनियों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाने का आह्वान किया था। ऐसा इसलिए, क्योंकि 1947 में इसी दिन संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 'प्रस्ताव संख्या 181' पारित किया था, जो फलस्तीन व इजरायल को दो स्वतंत्र मुल्क के रूप में स्वीकार करता है। इस साल यह दिन इसलिए विशेष बन गया है, क्योंकि इजरायल पर 7 अक्तूबर, 2023 के हमले के बाद इस पूरे क्षेत्र में जो तनाव का माहौल बना था, उसमें बेशक अभी नरमी दिख रही है, पर मूल सवाल अब भी अनुत्तरित है कि स्वतंत्र फलस्तीन साकार होगा अथवा नहीं? इजरायल-फलस्तीन मौजूदा समस्या के बीज 1993 के ओस्लो समझौते में छिपे हैं। यह संधि इजरायल और फलस्तीन मुक्ति संगठन (पीएलओ) क...