प्रयागराज, सितम्बर 9 -- प्रयागराज। सरकारी योजनाओं के तहत किए गए कार्यों और उनसे लोगों को मिल रहे लाभ की जांच कराने के लिए सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है। योजनाओं की सोशल ऑडिट के लिए साल में तीन बार करीब तीन-तीन करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जाती है। यह धनराशि पहले सोशल ऑडिट निदेशालय के खाते में जमा कराई जाती है। इसके बाद ऑडिट के माध्यम से यह जांच की जाती है कि संबंधित योजना में कितना काम हुआ और उससे वास्तविक रूप से कितने लोगों को लाभ मिला। सोशल ऑडिट की रिपोर्ट को योजनाओं की प्रभावशीलता का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। रिपोर्ट के जरिए यह देखा जाता है कि योजना के लिए आवंटित धनराशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए हुआ या नहीं, काम धरातल पर दिखाई दे रहा है या नहीं और पात्र लोगों तक उसका लाभ पहुंचा है या नहीं। ऑडिट के दौरान योजना के...