नई दिल्ली, दिसम्बर 15 -- दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली केवल राजनीतिक नहीं थी, बल्कि यह उस गहरे संकट की सार्वजनिक अभिव्यक्ति भी थी, जिससे आज देश की सबसे पुरानी पार्टी गुजर रही है। मंच से दिए गए भाषण, लगाए गए आरोप, लहराए गए बैनर और जवाब में भाजपा का तीखा पलटवार- इन सबसे यही संकेत मिल रहा था कि भारतीय राजनीति में कांग्रेस अपनी खोई हुई जमीन तलाशने की हड़बड़ी में है, लेकिन दिशा और भरोसा, दोनों का अभाव स्पष्ट है। सभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सत्तारूढ़ दल पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उसने कांग्रेस का 'वंदे मातरम्' तक चुरा लिया है, साथ ही उन्होंने यह दावा किया कि पार्टी की विचारधारा आज भी जिंदा है, हालांकि सवाल यह है कि क्या केवल विचारधारा के जीवित होने का दावा आज की राजनीति में पर्याप्त है, जब जनता ठोस मुद्दों और...
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