बस्ती, मार्च 27 -- बस्ती। जिले के दुबौलिया बाजार में गुरुवार को आयोजित नौ दिवसीय संगीतमयी श्रीराम कथा के सातवें दिन का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुआ। कथा में स्वरूपानंद ने श्रीराम विवाह का मार्मिक प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि धनुष अहंकार का प्रतीक था, जिसे भगवान राम ने तोड़कर यह संदेश दिया कि अहंकार का नाश ही धर्म की विजय है। माता सीता ने भगवान राम के गले में जयमाला डालकर उन्हें पति रूप में स्वीकार किया। धनुष भंग होते ही जहां साधु-संत और सज्जन राजा प्रसन्न हुए, वहीं वे दुष्ट राजा, जो धनुष को हिला तक नहीं सके थे, क्रोधित होकर राम-लक्ष्मण को बंदी बनाने की योजना बनाने लगे। इसी दौरान भगवान परशुराम का आगमन हुआ, जिसके बाद लक्ष्मण और परशुराम के बीच रोचक संवाद हुआ। कथा व्यास ने श्रीराम विवाह, अयोध्या वापसी और अन्य प्रसंगों का विस्तार...