रांची, दिसम्बर 23 -- रांची, वरीय संवाददाता। दिगंबर जैन मंदिर रांची में मंगलवार को जैन समाज के धर्म सभा में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुनि भावसागर ने कहा कि ध्यान अपने को खो देने की प्रक्रिया का नाम है। अपने को मिटा देने का नाम है। सब चीज़ों से निर्विचार होने का नाम है। आत्मा को परमात्मा बनाने का नाम है। अपने आप में डूबने का नाम है। मन से अलग हो जाने का नाम है। आत्मा से साक्षात्कार करने का नाम है। स्वयं अपने आप को देखने का नाम है। उन्होंने कहा कि सुख शांति का अमोघ उपाय है। मन को स्थिर करने की तकनीक है। ज्ञान की उपयोगी क्रिया है। जब ध्यान के फूल खिल जाते है तब आनंद की सुगंध फैल जाती है। जीवन का बगीचा महक उठता है। आत्म मंदिर में ध्यान का दीपक जलता है। योग से अयोग होना ही ध्यान का लक्ष्य है। ध्यान से आत्मा में...