नई दिल्ली, जुलाई 28 -- नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित् जाति आयोग (एनसीएससी) के पास ‌सेवा मामलों में बाध्यकारी आदेश पारित करने की न्यायिक शक्ति नहीं है। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि संविधान के तहत इसकी भूमिका सिफारिशी और सलाहकारी है, न्यायिक नहीं।जस्टिस संजय करोल और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि 'एनसीएससी एक संवैधानिक निकाय है जिसे संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत स्थापित किया गया था, ताकि अनुसूचित जातियों के सदस्यों के सामाजिक-आर्थिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक हितों की शोषण से रक्षा की जा सके। हालांकि पीठ ने कहा कि एनसीएससी को दी गई शक्तियां सीमित हैं और यह साफ है कि एनसीएससी अनुच्छेद 338ए और 338बी के तहत इसके सहयोगी निकाय सामाजिक भलाई के उद्देश्य वाले संवैधानि...