अयोध्या, अगस्त 30 -- अयोध्या । दिगम्बर जैन मंदिर में चल रहे दश लक्षण पर्व के दूसरे दिन मृदु भाव मार्दव यानी मान से मुक्त रहने या उससे ऊपर उठने के मूल्य के प्रति समर्पित हुआ। दिन की शुरुआत भगवान ऋषभदेव के अभिषेक और शांति प्रार्थना से हुई। प्रथम तीर्थंकर के सिर पर पंचगव्य की शांति धारा अर्पित करने के बाद सुमेरु पर्वत का पूजन किया गया। मुख्य पर्वत के साथ उप पर्वतों और वनों की पूजा हुई। प्रतिष्ठाचार्य विजयकुमार जैन ने मंत्र पाठ कराया और देश के विभिन्न हिस्सों से आए पांच सौ से अधिक श्रद्धालुओं ने आस्था के प्रतीकों पर धूप-दीप-गंध से पूजन किया। दश लक्षण पर्व का दूसरा दिन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं भक्ति भाव से परिपूर्ण रहा। जैन धर्म की सर्वोच्च साध्वी आर्यिका गतिशील ज्ञानमती माता ने कहा कि इन्द्र नाम का विद्याधर इन्द्र के समान वैभवशाली था फिर भ...