नई दिल्ली, नवम्बर 7 -- सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश न तो सजा देने वाला है और न ही बदनाम करने वाला है। इस आदेश का मतलब यह भी नहीं है कि कर्मचारी को किसी तरह के गलत काम में दोषी पाया गया है। न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर की पीठ ने छत्तीसगढ़ सरकार के अपने 14 में से पांच कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के आदेश को सही ठहराया। पीठ ने कहा कि सक्षम अधिकारी इस बात से संतुष्ट होने के बाद ऐसा फैसला ले सकता है कि किसी कर्मचारी को सेवा में बनाए रखना अब जनहित में उचित नहीं है। पीठ ने कहा कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश न तो दंडात्मक होता है और न ही इससे कर्मचारी के आचरण पर कोई सवाल उठता है। इस आदेश का यह अर्थ भी नहीं है कि कर्मचारी को किसी गलत काम का दोषी पाया गया है। यह भी पढ़ें- अधूरी जांच पर...