रांची, मई 26 -- रांची में रिम्स के द्वारा अधिग्रहित जमीन को बेचने में एसीबी की जांच में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। एसीबी ने जांच में पाया है कि रिम्स की 60 डिसमिल जमीन को जमीन माफियाओं ने एक आदिवासी अनपढ़ महिला को मोहरा बना बेच दिया। साल 2015 में जमीन के दस्तावेज को ऑनलाइन किया जा रहा था, तब माफियाओं ने महिला का इस्तेमाल कर रजिस्टर 2 में नाम अंकित कराया। इसमें तब टाउन सीओ रहे अफसर ने भी अपने पद का दुरुपयोग कर जमीन माफियाओं को लाभ पहुंचाया। दस्तावेज के मुताबिक, मौजा मोरहाबादी, खाता नंबर 107, प्लॉट नंबर 1963/1693 की कुल 93 डिसमिल जमीन थी, जिसे वर्ष 1947 में गजधर बड़ाइक से अब्दुल गफूर खान और फिर 1962 में बनारसी दास अरोड़ा ने खरीदा था। सरकार ने वर्ष 1968-69 (केस नंबर 01/68-69) में रिम्स के लिए बनारसी दास अरोड़ा को उचित मुआवजा देकर इसमें से 60 डि...