लखनऊ, अप्रैल 1 -- लखनऊ, संवाददाता। लखनऊ विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग की शोधार्थी डॉ. कृतिका अग्रवाल और डॉ. बबीता जायसवाल ने लाइब्रेरी वर्गीकरण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अध्ययन पूरा किया है। यह शोध पिछले 70 वर्षों (1954-2024) में प्रकाशित लगभग 296 शोध-पत्रों के गहन विश्लेषण पर आधारित है। इस अध्ययन के अनुसार, भारत में पुस्तकालय विज्ञान पर शोध का सबसे सुनहरा दौर 1960 का दशक था। प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. एसआर रंगनाथन के सिद्धांतों ने इस क्षेत्र को वैश्विक पहचान दिलाई। शोध में पाया गया कि शुरुआती समय में विद्वान अकेले शोध करना पसंद करते थे, लेकिन साल 2000 के बाद सामूहिक यानी सहयोगात्मक शोध की प्रवृत्ति बढ़ी है। बैंगलोर स्थित डॉक्यूमेंटेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर (डीआरटीसी) इस क्षेत्र में सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनकर उभरा है...