नई दिल्ली, जुलाई 23 -- सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि जमीन अधिग्रहण के बदले मुआवजा तय करने से जुड़े विवादों का फैसला नौकरशाहों के बजाए, कानूनी रूप से प्रशिक्षित लोगों द्वारा किया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि नौकरशाहों द्वारा जमीन के बदले मुआवजा तय करना स्वीकार्य नहीं हो सकता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और वी. मोहना की पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दाखिल अपील पर विचार करते हुए यह टिप्पणी की है, जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम-‌1956 की धारा 3जी और 3जे को असंवैधानिक घोषित किया गया था। ये प्रावधान मध्यस्थता के जरिए मुआवजा तय करने का कानूनी ढांचा बनाते हैं, खासकर तब जब जमीन मालिक तय की गई मुआवजे की रकम पर आपत्ति जताते हैं। यह भी पढ़ें- जमीन अधिग्रहण में मुआवजा का विवाद नौकरशाहो...