हाथरस, मार्च 21 -- अधिकार नहीं पर जिम्मेदारी पूरी, मानदेय के लिए भटकना मजबूरी -(A) बोले हाथरसअधिकार नहीं पर जिम्मेदारी पूरी, मानदेय के लिए भटकना मजबूरीरोजगार सेवक ग्राम पंचायतों में वर्ष 2008 से काम कर रहे हैं। यह लोग मजदूरों को बीवी जीरामजी (मनरेगा) के तहत काम दिलाते हैं, जिससे मजदूरों की जिंदगी बेहतर होती है। यह अलग बात है कि ये खुद अपनी जिंदगी को बेहतर नहीं मानते हैं, कभी इनसे प्रधान खफा हो जाते हैं तो कभी पब्लिक। मात्र दस हजार रुपये मानदेय है। वह भी समय पर नहीं मिलता है। करीब 60 से 70 रोजगार सेवकों का मानदेय तो आठ से 22 महीने से मिला ही नहीं है। ऐसे में रोजगार सेवक दुश्वारियों के दुष्चक्र से निकलने को लगातार संघर्ष कर रहे हैं। रोजगार सेवकों की इसी समस्या को लेकर आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान ने बोले हाथरस अभियान के तहत हमने सदर ब्लॉक मे...
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