बस्ती, मार्च 29 -- दुबौलिया, निज संवाददाता। अधर्म पर धर्म की विजय ही रामायण का सार है। राम धर्म के प्रतीक और रावण अधर्म के प्रतीक हैं। यह बातें कथा व्यास स्वरूपानन्द ने श्रीराम कथा के समापन पर कही। दुबौलिया बाजार के राम विवाह मैदान में चल रही कथा के दौरान उत्तरकांड के रामराज्य का वर्णन किया गया। कहा व्यास ने कहा कि उत्तर का अर्थ होता है अंतिम, उत्तीर्ण व मोक्ष। हमारे जीवन में जो पाप रूपी लंका नगरी में रावण का राज्य है, उसका अंत कर देना है। राम-रावण की लड़ाई वास्तव में धर्म और अधर्म के बीच की लड़ाई है। कथा में अध्यात्मिक रहस्य है। वास्तव में व्यक्ति के अंदर धर्म और अधर्म के बीच संघर्ष चल रहा है। रावण एक प्रवृत्ति है। उसके अंत के लिये श्रीराम की शरण लेना पड़ता है। वे शरणागत की रक्षा करते हैं। समापन पर हवन के बाद भण्डारे में श्रद्धालुओं ने प्रस...