अररिया, अगस्त 15 -- फुलेन्द्र कुमार मल्लिक अररिया। यह भी पढ़ें- आज फटेहाल जीवन जी रहे आजादी के दीवाने कमलानंद का परिवार अररिया का गौरशाली अतीत रहा है। यहां के अतीत के पन्नों पर एक से बढ़कर एक स्वतंत्रता सेनानियों की अनकही कहानी दबी पड़ी मिलेगी, जिन्होंने मातृभूमि को गोरे सरकार से मुक्त कराने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था। अंग्रेजों की गोलियां खायी, लेकिन कभी आह तक नहीं बोले। आज के युवा पीढ़ियों को इनके संघर्ष और शहादत से संघर्ष लेने की जरूरत है। यह भी पढ़ें- युगों-युगों तक याद किए जाएंगे आजादी के दीवानेअररिया के स्वतंत्रता सेनानी कहा जाता है कि आजादी के ये रणबांकुरे कई वर्षों तक गुमनामी के अंधेरे में दर-दर भटकते रहे और अन्तत: वतन के लिए शहीद हो गये। क्रांतिकारियों की जब भी चर्चा होती है तो सबसे पहले पंडित रामदेनी तिवारी द्विजदेनी का...