औरंगाबाद, जनवरी 10 -- मदनपुर प्रखंड में कभी जल संग्रहण और सिंचाई के प्रमुख स्रोत रहे कई पईन और आहर अतिक्रमण के कारण अपना अस्तित्व खो चुके हैं। जंगलों और पहाड़ों से प्राकृतिक रूप से निकले आहर तथा वर्षों पूर्व खोदे गए पैईन अब खेतों में मिला दिए गए हैं या उन पर मकानों का निर्माण कर दिया गया है। अंजनवां, भेलीबांध, बादम, उमगा पहाड़, कंतरी, पिछुलिया पहाड़, हदहदवा पहाड़, बादम पहाड़ और गौरीशंकर पर्वत तालाब सहित अन्य पहाड़ों से निकलने वाले आहर कभी सिंचाई का मुख्य साधन थे। कांग्रेस के प्रखंड अध्यक्ष और किसान नेता लालदेव यादव ने कहा कि सरकार की उदासीनता के कारण जल स्रोतों पर अतिक्रमण बढ़ा और उनका अस्तित्व समाप्त हो गया। उन्होंने मांग की कि सरकार सर्वे कराकर पैईन और आहर को अतिक्रमण से मुक्त कराए ताकि जल संग्रहण और खेतों की सिंचाई का सशक्त साधन फिर से...