नई दिल्ली, जून 17 -- साल 1960 हिंदी सिनेमा के लिए बेहद खास था। इस साल बॉक्स ऑफिस पर कई बड़ी फिल्में रिलीज हुई। इसी साल दिलीप कुमार और मधुबाला की फिल्म मुगल-ए आजम आई थी। बरसात की रात, गुरु दत्त की चौदहवीं का चांद जैसी यादगार फिल्में रिलीज हुई थीं। ये वो फिल्में थीं जिन्होंने हिंदी सिनेमा और उस समय के म्यूजिक को नया रूप दिया। इन फिल्मों का म्यूजिक आज तक अमर है। उस साल ऐसे गीत बने जिसे दुनिया में कोई दूसरा दोबारा नहीं बना पाया। इसी साल 'चौदहवी का चांद हो या आफताब हो', 'प्यार किया तो डरना क्या' जैसे गानों ने जन्म लिया था। लेकिन एक ऐसा भी गाना बना जिसने इन सभी को पछाड़ते हुए म्यूजिक डायरेक्टर को अवॉर्ड दिलवा दिया। वो गाना था 'अजीब दास्तां है ये कहां शुरू कहां खत्म'।अजीब दास्तां है ये..इस गाने ने किया कमाल 1960 में राज कुमार और मीना कुमारी की एक ...