नई दिल्ली, जनवरी 28 -- बारामती के पास एक चार्टर्ड विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजित पवार का आकस्मिक निधन सिर्फ एक परिवार की क्षति नहीं है, यह एक ऐसी क्षति है, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में उपजे शून्य की भरपायी आसान नहीं होगी। 66 वर्षीय 'दादा' का जाना उस समय हुआ, जब महाराष्ट्र में त्रिशंकु राजनीति आकार ले रही थी। सच कहें, तो एक नए प्रायोगिक दौर से गुजर रही थी। अजित पवार को महाराष्ट्र की राजनीति में जमीन से जुड़े 'कुशल प्रशासक' के रूप में पहचाना जाता था। कई बार सुबह छह बजे मंत्रालय पहुंचकर काम शुरू कर देने की उनकी शैली और कड़क मिजाज ने राज्य के नौकरशाहों व जनता के बीच उनकी 'डिलीवरी मैन' की छवि मजबूत बनाई थी। वह शरद पवार के भतीजे जरूर थे, पर उन्होंने अपनी खुद की सियासी सल्तनत खड़ी की थी। सिंचाई से लेकर वित्त मंत्रालय तक, ...