जौनपुर, फरवरी 28 -- जौनपुर, कार्यालय संवाददाता। आप नई बाइक या कार खरीदते हैं और कुछ दिन के बाद पता चलता है कि जो नंबर आपको मिला उसपर पांच साल पहले चालान हो चुका है तो थोड़ा आश्चर्य जरूर होगा। होना भी चाहिए, क्योंकि जब आपने गाड़ी ली ही थी नहीं और उस सीरीज का नंबर बाजार में आया ही नहीं था तो फिर चालान कैसे कटा? सवाल भले बड़ा हो, लेकिन परिवहन विभाग और यातायात पुलिस सबकुछ असंभव को भी संभव बना सकता है। ताजा मामला जौनपुर का है। यहां कुछ इसी तरह का मामला हुआ है। गाड़ी शोरूम से बाहर निकलने के पांच साल पहले ही उसपर आठ सौ रुपये का चालान कट गया था। मजे की बात तो यह कि जिस उप निरीक्षक ने चालान काटा वह वाकई इतना दिमांग का तेज था कि भविष्य में किस गाड़ी को कौन सा नंबर मिलेगा यह भी पता कर लिया था। मड़ियाहूं निवासी राजेंद्र प्रसाद की की पुत्री अंजू सिकरा...
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