बरेली, जुलाई 7 -- पिता की असमय मृत्यु के बाद बहेड़ी के सौरभ पर जिम्मेदारियों का पहाड़ टूट पड़ा था। एक पल के लिए ऐसा लगा मानो उसके सारे सपने थम से गए हों, लेकिन मजबूत इरादों वाले सौरभ ने जिम्मेदारियों के इस बोझ को अपनी ताकत बना लिया। उसने देश सेवा और परिवार को संभालने के लिए इंडियन आर्मी की तैयारी शुरू की। कड़ी मेहनत के दम पर पहले उसका चयन अग्निवीर में हुआ। इसके बाद भी सौरभ की उड़ान यहीं नहीं रुकी और उसने सेना के सबसे कठिन माने जाने वाले विंग पैरा कमांडो में जाने की ठानी। चयन प्रक्रिया के दौरान परीक्षा दे रहे 500 से अधिक युवाओं में से केवल नौ लोग ही शॉर्टलिस्ट हो सके, जिसमें सौरभ ने पूरे ग्रुप में पहला स्थान हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया। सौरभ पिछले चार महीने से अंतर्राष्ट्रीय कोच अजय कश्यप के दिशा-निर्देशन में निशुल्क प्रशिक्षण लेक...