रामपुर, अगस्त 14 -- 15 अगस्त 1947 को पूरे देश में आजादी का जश्न मन रहा था, लेकिन रामपुर में उस दिन जश्न नहीं, बल्कि हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल था। कुछ लोग मुल्क की तरह रामपुर की भी आजादी की मांग कर रहे थे। वहीं कुछ खास लोग ऐसे भी थे जो रामपुर को पाकिस्तान में शामिल कराने की मांग कर रहे थे। अंग्रेजों की गुलामी से देश भले ही 1947 में आजाद हो गया, लेकिन रामपुर को यह आजादी दो साल बाद मिली। यहां रामपुर नवाब का राज चलता रहा। 1949 में जाकर रामपुर आजाद हुआ। लेकिन, इससे पहले रामपुर में खासा बवाल हुआ। वरिष्ठ अधिवक्ता रहे स्वर्गीय शौकत अली खां न सिर्फ बताते थे बल्कि, उनके द्वारा लिखी गई किताब-रामपुर का इतिहास के अनुसार-रामपुर में 15 अगस्त 1947 को जश्न नहीं मना था, बल्कि लोग परेशान थे। यहां तीन अगस्त की शाम को कुछ लोगों ने रणनीति बनाई और चार अगस्त 194...