नई दिल्ली, जून 6 -- दिल्ली की एक अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि कोई भी शादीशुदा शख्श सिर्फ बेरोजगार होने का दावा करके अपनी पत्नी और नाबालिग बच्चे के प्रति अपनी कानूनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता है। इसके साथ ही अदालत ने एक व्यक्ति को अपने बेटे के लिए 6,000 रुपए का महीने का गुजारा-भत्ता देने का आदेश दे दिया। एडिशनल सेशंस जज शीतल चौधरी प्रधान ने यह फैसला घरेलू हिंसा से जुड़े एक मामले में महिला की याचिका पर सुनाया। याचिकाकर्ता महिला की साल 2013 में हुई थी और वह 2015 के बाद से ही अपने बेटे के साथ अलग रह रही है। अलग होने के बाद से ही पति ने उसे किसी तरह का गुजारा भत्ता नहीं दिया था। अदालत में लगाई अपनी याचिका में महिला ने ट्रायल कोर्ट के दिए उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने उस महिला को 'घरेलू हिंसा से महिलाओं क...