धनबाद, जनवरी 17 -- न्यू टॉउन हॉल में उद्घाटन समारोह में रांची से ऑनलाइन जुड़े मुख्य अतिथि पद्यश्री मुकुंद नायक ने कहा कि अखरा हमारी संस्कृति का परिचायक है। उन्होंने अखरा संस्कृति बचाने, झारखंड व भारत को बढ़ाने का मंत्र दिया। कहा कि पहले हमारे पूर्वज दिनभर की थकान मिटाने शाम में अखरा में जुटते थे। गीत-संगीत व मांदर की थाप में थकान मिट जाती थी। हालांकि हमारे पूर्वज कम पढ़-लिखे थे। फिर भी उनके पास जादू था कि वे लोग खुश रहते थे। प्राकृतिक व संस्कृति को बचाते हुए खुशहाल रहते थे। आज देश की आजादी के 75 साल व झारखंड गठन के 25 साल हो गए। विकसित बनने की ओर से हम बढ़ रहे हैं, लेकिन सामाजिक सौहार्द, सांस्कृतिक सुकून पहले वाला नहीं रहा। युवा वर्ग ठान ले तो समाज, राज्य व देश की दिशा को आत्मनिर्भर बनाएंगे। राज्य खुशहाल होगा। उन्होंने इस दौरान पहले के गा...