वाराणसी, जुलाई 31 -- वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। इमाम अली रजा की शहादत की याद में शुक्रवार को काली महाल मस्जिद में मजलिस-ए-अजा हुई। इसके बाद इमाम अली रजा का अंगूरों वाला ताबूत अकीदत के साथ उठाया गया। जिसे देखकर अजादारों की आंखें नम हो गईं। मजलिस को जाकिरा इसरार फातिमा ने खिताब किया। उन्होंने कहा कि इमाम मूसा काजिम के फरजंद थे और उनकी विलादत मदीना-ए-मुनव्वरा में हुई। इमाम रजा अपने जमाने के सबसे बड़े आलिम थे। जाकिरा ने कहा कि मामून ने जाहिरी तौर पर इमाम रजा को अपना उत्तराधिकारी बनाया लेकिन दिल उनकी बढ़ती अजमत और मोहब्बत से जलता रहा। लोगों का इमाम की तरफ झुकाव मामून को बर्दाश्त न हुआ। आखिरकार उसने साजिश के तहत इमाम को अंगूर में जहर खिलाकर शहीद कर दिया। इसी से इमाम रजा के ताबूत को अंगूरों वाला ताबूत कहा जाता है। मजलिस के बाद अंजुमन हैदरी, चौक ...