अंधविश्वास के अंधेरे से निकल बाहर बिष्णुगढ और बरही की घटना हमें सिखाती है मां के ममत्व और विवेक को
हजारीबाग, मई 9 -- हजारीबाग हमारे प्रतिनिधि मदर्स डे पर जहां हम मां के असीम प्रेम और त्याग का उत्सव मनाते हैं, वहीं विष्णुगढ़ के कुसुंभा गांव की वह हृदयविदारक घटना हमें समाज की एक कड़वी सच्चाई से रूबरू कराती है। जहां एक मां ने अंधविश्वास के वशीभूत होकर अपने बीमार बेटे की सलामती के लिए अपनी ही 13 वर्षीय मासूम बेटी की बलि दे दी। विष्णुगढ़ (कुसुम्बा गांव) में मार्च के अंत में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। एक मां रेशमी देवी ने अपने बेटे की बीमारी को ठीक करने और पारिवारिक संकट दूर करने के लिए तांत्रिक शांति देवी के बहकावे में आकर अपनी ही 12 वर्षीय बेटी की नरबलि दे दी। यह भी पढ़ें- हजारीबाग में लड़की की रेप के बाद हत्या मामले में सरकार ने जमा की रिपोर्ट, HC को दिया सीलबंद लिफाफा अष्टमी की रात को तांत्रिक के परामर्श पर मां और उसके सहयोगी भ...
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