फतेहपुर, अप्रैल 6 -- फतेहपुर। दोआबा में मासूमों की सेहत और अंधविश्वास के बीच जंग छिड़ी हुई है। सूखा रोग (रिकेट्स) से पीड़ित बच्चों के लिए आधुनिक चिकित्सा के बजाय ताबीज और भभूत का सहारा लेना उनके जीवन पर भारी पड़ रहा है। जिला अस्पताल के विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर इलाज न मिलने और घरेलू टोटकों के चक्कर में बच्चों की स्थिति गंभीर हो रही है, जिससे उनके बचने की संभावना कम हो जाती है। अस्पताल से ज्यादा बाबाओं पर भरोसाजिला अस्पताल की बाल रोग ओपीडी में तैनात डॉ. मूलचन्द्रा के अनुसार, हर दिन ओपीडी में दो से से बच्चे सूखा रोग से पीड़ित आ रहे हैं। चिंताजनक पहलू यह है कि परिजन पहले झोलाछाप र ताबीज वाले बाबाओं के पास चक्कर काटते हैं। जब बच्चा निढाल हो जाता है और हड्डियां टेढ़ी होने लगती हैं, तब उसे अस्पताल लाया जाता है। शुक्रवार को भी ऐसे ही चार ग...