पीयूष श्रीवास्तव, अप्रैल 4 -- यूपी के प्रयागराज में यमुना नदी पर बना ऐतिहासिक पुल करीब 160 साल तक बिना बड़े बदलाव के रेलगाड़ियों का भार झेलता रहा। इस पुल की पटरियों पर डेढ़ सदी से अधिक समय तक ट्रेनें सरपट दौड़ती रहीं, लेकिन पहली बार इसके पुराने कॉर्नर स्पैन को बदलने की नौबत आई। उत्तर मध्य रेलवे ने पुल के दोनों किनारों के शोर स्पैन को बदलकर इसे फिर से सुरक्षित संचालन के लिए तैयार कर दिया है। अंग्रेजों के जमाने में 15 अगस्त 1865 को शुरू हुआ यह पुल उस दौर की इंजीनियरिंग क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। खास बात यह है कि इस पुल पर रेल और सड़क दोनों का संचालन होता है। एक ही ढांचे पर दोहरे उपयोग की यह व्यवस्था आज भी लोगों को आकर्षित करती है। लंबे समय से निरंतर उपयोग के कारण पुल के किनारों वाले हिस्सों पर दबाव बढ़ गया था, जिसे देखते हुए रे...
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