सीवान, अगस्त 15 -- विनय पांडेय, महाराजगंज। आजादी की लड़ाई में महाराजगंज की धरती भी क्रांतिकारियों के अदम्य साहस और बलिदान की गवाह रही है। 16 अगस्त 1942 का वह दिन इतिहास के पन्नों में देशभक्ति, साहस और बलिदान की अमिट गाथा बनकर दर्ज है, जब अंग्रेजी हुकूमत की बंदूकों के सामने तिरंगा लेकर निकले आजादी के दीवानों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। इसी संघर्ष में महुआरी गांव निवासी अमर महतो के पुत्र शहीद चंद्रमा प्रसाद भी अंग्रेजी गोलियों के शिकार हुए थे। बताया जाता है कि वर्ष 1942 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारत छोड़ो आंदोलन ने पूरे देश में अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी थी। गांधीजी के 'करो या मरो' के आह्वान ने देशवासियों के भीतर आजादी की ऐसी ज्वाला जलाई, जिसे अंग्रेजी हुकूमत की बंदूकें भी नहीं बुझा सकीं। महाराजगंज में भी बड़ी संख्या में नौ...