नई दिल्ली, जुलाई 14 -- इस बर्बर हत्याकांड के पीड़ित परिजनों को ही नहीं, इंसाफपसंद हरेक भारतीय को इस क्षण का इंतजार था और करीब सवा छह साल बाद उनका यह इंतजार खत्म हुआ है। साल 2020 में दिल्ली दंगों के दौरान 25 फरवरी को जिस बेरहमी से आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या की गई थी, उसने देशवासियों के रोंगटे खड़े कर दिए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंकित के शरीर पर चाकुओं के 51 निशान हत्यारों की निर्ममता की गवाही दे रहे थे। सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह के 13 जुलाई के फैसले से यह साफ हो गया है कि इस बर्बर कृत्य को अंजाम देने वाले कौन लोग थे और उस दंगे के दौरान उन्होंने किस कदर कहर बरपाया था। अदालत ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को अंकित की हत्या का दोषी करार दिया है, जबकि छह अन्य आरोपियों को सुबूतों के अभाव में बरी कर ...