
Noida, April 16 -- READ IN ENGLISH
अक्षय तृतीया: क्या है असली महत्त्व और क्या करें इस दिन
अक्षय तृतीया, जिसे अखा तीज भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आती है (अप्रैल-मई)।
'अक्षय' शब्द का अर्थ है - जो कभी समाप्त न हो, यानी ऐसा शुभ फल जो हमेशा बढ़ता रहे। इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य उन्नति और सौभाग्य ही देता है।
मान्यता है कि इस दिन किया गया हर शुभ कार्य अक्षय (कभी नष्ट न होने वाला) होता है और समय के साथ फलता-फूलता है। इसलिए हमारे पूर्वज इस दिन दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों को विशेष महत्व देते थे।
लेकिन आज के समय में, इस दिन को सोना खरीदने तक सीमित कर दिया गया है, जिससे इसका असली आध्यात्मिक महत्व कहीं खो गया है।
इस ब्लॉग में हम अक्षय तृतीया के वास्तविक महत्व को समझेंगे और जानेंगे कि इस दिन हमें वास्तव में क्या करना चाहिए।
अक्षय तृतीया 2026: तिथि और समय
इस वर्ष अक्षय तृतीया 19 अप्रैल 2026 (रविवार) को है।
शुभ मुहूर्त:
तृतीया तिथि प्रारंभ: 19 अप्रैल 2026, सुबह 10:49 बजे
तृतीया तिथि समाप्त: 20 अप्रैल 2026, सुबह 07:27 बजे
अक्षय तृतीया का महत्व
न माधव समो मासो न कृतेन युगं समम्।
न च वेद समं शास्त्रं न तीर्थ गंगायं समम्।।
अर्थात वैशाख मास जैसा कोई महीना नहीं, सतयुग जैसा कोई युग नहीं, वेदों जैसा कोई शास्त्र नहीं और गंगा जैसा कोई तीर्थ नहीं।
यह श्लोक वैशाख महीने के महत्व को दर्शाता है, जिसमें अक्षय तृतीया आती है - यह समय धार्मिक और पुण्य कार्यों के लिए सबसे शुभ माना गया है।
शास्त्रों में उल्लेख
महाभारत में वर्णित है कि इस दिन किए गए स्नान, हवन, होम, दान और जप का फल अनंत गुना बढ़ जाता है।
भविष्य पुराण के अनुसार, इस दिन छोटा या बड़ा कोई भी दान किया जाए - उसका फल अक्षय (अनंत) हो जाता है।
इतिहास की 9 घटनाएँ जो बनाती हैं अक्षय तृतीया को बहुत ख़ास
भगवान परशुराम का जन्म - भगवान विष्णु के छठे अवतार का अवतरण इसी दिन हुआ।
सुदामा और श्रीकृष्ण - सुदामा के प्रेम से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें अपार समृद्धि दी।
अक्षय पात्र की प्राप्ति - द्रौपदी को ऐसा पात्र मिला जिससे कभी भोजन खत्म नहीं हुआ।
गंगा अवतरण - मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण इसी दिन हुआ।
त्रेता युग की शुरुआत - इस दिन सतयुग से त्रेता युग का प्रारंभ हुआ।
महाभारत की रचना - वेद व्यास ने गणेश जी के साथ महाभारत लिखना शुरू किया।
जगन्नाथ रथ यात्रा की तैयारी - पुरी में इस दिन से तैयारी शुरू होती है।
बांके बिहारी जी के दर्शन - वृंदावन में इस दिन उनके चरण दर्शन होते हैं।
बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलना - उत्तराखंड में मंदिर के द्वार खुलते हैं।
ये सभी घटनाएँ दिखाती हैं कि अक्षय तृतीया का दिन बहुत शुभ होता है और इस दिन शुरू किया काम हमेशा बढ़ता ही है।
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धर्मदास की कथा
प्राचीन समय में एक गरीब लेकिन बहुत धार्मिक और ईमानदार व्यक्ति था, जिसका नाम धर्मदास था। वह हमेशा भगवान में विश्वास रखता था और अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य करता रहता था।
एक दिन अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर, उसने सोचा कि आज के दिन कुछ दान जरूर करना चाहिए। उसके पास ज्यादा कुछ नहीं था, फिर भी उसने जो थोड़ा-बहुत अन्न और धन था, वह जरूरतमंदों में बांट दिया।
उसकी सच्ची श्रद्धा और निःस्वार्थ भावना से भगवान बहुत प्रसन्न हुए। धीरे-धीरे उसकी किस्मत बदलने लगी, उसके घर में सुख-समृद्धि आने लगी और कभी किसी चीज़ की कमी नहीं रही।
अक्षय तृतीया के दिन सच्चे मन से किया गया दान और अच्छे कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाते, बल्कि जीवन में हमेशा बढ़ते रहते हैं।
क्या अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना जरूरी है?
पहले यह दिन दान और पुण्य कार्यों के लिए ही होता था।
आज यह दिन केवल सोना खरीदने का त्योहार बन गया है, जिसका शास्त्रों में कहीं उल्लेख नहीं मिलता।
इसके अलावा, लोग इस दिन मुहूर्त जानें बिना विवाह, व्यापार आदि करने लगे हैं, जो शास्त्रों के अनुसार उचित नहीं है।
'मुहूर्त चिंतामणि' के अनुसार, अक्षय तृतीया युगादि तिथि है, इसलिए इस दिन सामान्य शुभ कार्य नहीं करने चाहिए।
हमारा सुझाव है कि इस दिन केवल धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों पर ही ध्यान दें।
अक्षय तृतीया पर क्या करें?
1- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें
2- विष्णु सहस्रनाम और लक्ष्मी मंत्र का जप करें
3- जौ, चना दाल, सत्तू और फूल अर्पित करें
4- पानी से भरे घड़े का दान करें
5- पंखे, छाते, कपड़े, घी, चीनी आदि दान करें
6- जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को भोजन कराएं
7- किसी अच्छे कार्य में सहयोग करें (जैसे शिक्षा)
निष्कर्ष
इस दिन किया गया दान और पुण्य कभी समाप्त नहीं होता, बल्कि जीवनभर और जन्मों तक फल देता है।
दान करने से पापों का बोझ कम होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि बढ़ती है।
इसलिए, अक्षय तृतीया पर सच्चे मन से दान और धार्मिक कार्य करें, यही इसका वास्तविक महत्व है।
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