मुरैना , मई 21 -- राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने कहा है कि पंचायतों और नगरीय निकायों जैसी स्थानीय स्वशासी संस्थाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए स्वयं के राजस्व स्रोत विकसित करने चाहिए।

श्री पवैया ने आज मुरैना कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में कहा कि बजट हमेशा यथार्थपरक और व्यवहारिक होना चाहिए। वित्तपोषण के प्रमुख माध्यम केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाले अनुदान तथा स्वयं का राजस्व होते हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों को अत्यधिक परावलंबी बनने के बजाय आत्मनिर्भरता की दिशा में कार्य करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करना आवश्यक है और इसके लिए नमूना परीक्षण तथा गुणवत्ता नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं अपनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वित्तपोषण का उद्देश्य किसी एक व्यक्ति को समृद्ध बनाना नहीं, बल्कि समग्र विकास सुनिश्चित करना है।

श्री पवैया ने कहा कि पंचायतों और नगरीय निकायों में पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक है। वित्तीय सहयोग से पहले संस्थाओं में पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने सोलर ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और नवाचारों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों को स्थानीय मेलों, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। गोशालाओं के क्षेत्र में नवाचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ग्वालियर की लालटिपारा गौशाला आधारित सीएनजी परियोजना की तर्ज पर मुरैना में भी संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।

बैठक में राज्य वित्त आयोग के सदस्य के.के. सिंह ने कहा कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के समन्वय से ही राजस्व वसूली प्रभावी होगी और समग्र विकास संभव हो सकेगा। उन्होंने पंचायतों और नगरीय निकायों में नवाचार और सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देने पर बल दिया।

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