चेन्नई , मई 21 -- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने गुरुवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर 23 नये मंत्री शामिल किये हैं जिनमें कांग्रेस के दो विधायक भी शामिल हैं।
कांग्रेस 59 साल बाद तमिलनाडु में सरकार में शामिल हो पायी है।
विजय मंत्रिमंडल का यह पहला विस्तार है। राज्य में विधानसभा चुनाव में भारी उलट-फेर कर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी तमिलगा वेट्री कषगम (टीवीके) ने कांग्रेस, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी तथा विदुथलाई चिरुथैगल काच्ची के सहयोग से सरकार बनायी थी। श्री विजय ने 10 मई को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। उनके साथ टीवीके के नौ अन्य विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली थी।
श्री विजय मंत्रिमंडल के इस पहले विस्तार के साथ ऐसी कई चीजें पहली बार हुईं हैं, जो पिछले साठ साल में नहीं देखी गई थीं। राज्य में पहली बार ऐसी गठबंधन सरकार बनी है जिसने द्रविड़ पार्टियों के छह दशक पुराने एकाधिकार को खत्म कर दिया है। इसके साथ ही, इस नए मंत्रिमंडल में महिलाओं और दलितों को अब तक का सबसे बड़ा प्रतिनिधित्व मिला है।
इससे पहले साल 1952 में सी राजगोपालाचारी ने एक गठबंधन सरकार का नेतृत्व किया था, लेकिन 1967 में द्रविड़ पार्टियों के उभार के बाद से हमेशा एक ही पार्टी का शासन रहा। खास बात यह है कि इस विस्तार में टीवीके की नई सहयोगी पार्टी कांग्रेस के भी दो विधायकों को मंत्री बनाया गया है। राज्य में 59 साल बाद ऐसा हुआ है जब कांग्रेस सरकार का हिस्सा बनी है। इससे पहले साल 1967 में के कामराज और भक्तवत्सलम के शासन के अंत के साथ ही राज्य से कांग्रेस राज खत्म हो गया था और तब से द्रविड़ पार्टियों का ही दबदबा रहा था।
इस मंत्रिमंडल में पहली बार चार महिला मंत्रियों और सात दलित मंत्रियों को जगह मिली है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इन सात दलित मंत्रियों में से दो कांग्रेस के हैं और बाकी सत्ताधारी टीवीके पार्टी के हैं।
कैबिनेट के 33 सदस्यों में से श्री विजय समेत 31 मंत्री बिल्कुल नए चेहरे हैं, यानी वे पहली बार मंत्री बने हैं। सिर्फ दो चेहरे ही ऐसे हैं जो पहले चुनाव जीत चुके हैं, अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के पूर्व मंत्री के ए सेंगोट्टइयन (जिनका विभाग आज वित्त से बदलकर राजस्व कर दिया गया) और ग्रामीण विकास एवं जल संसाधन मंत्री एन आनंद। श्री सेंगोट्टइयन ने अन्नाद्रमुक के टिकट पर तमिलनाडु में कई बार चुनाव जीता है, जबकि श्री आनंद इससे पहले पुडुचेरी से चुनाव जीत चुके हैं।
अगर दलितों की राजनीति करने वाली पार्टी वीसीके भी मुख्यमंत्री विजय का न्योता स्वीकार कर सरकार में शामिल हो जाती है, तो दलित मंत्रियों की संख्या बढ़कर आठ हो जाएगी। यह तमिलनाडु के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा होगा, जिसे राज्य में सामाजिक न्याय की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार में शामिल होने पर वीसीके को 'आदि द्रविड़ और जनजाति कल्याण विभाग' सौंपा जाएगा। इस समय शामिल किए गए सभी सात दलित मंत्रियों को बहुत ही महत्वपूर्ण विभाग दिए गए हैं, जिनमें एक महिला भी शामिल हैं। कांग्रेस विधायक पी विश्वनाथन को उच्च शिक्षा विभाग, ए राजमोहन (एगमोर सीट) को स्कूली शिक्षा विभाग और वी गांधीराज (अरक्कोणम सीट) को सहकारिता विभाग की जिम्मेदारी मिली है।
केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन को चुनाव में हराने वाली और अवनियाशी सुरक्षित सीट से जीतकर आईं सुश्री कमली को पशुपालन विभाग दिया गया है। वहीं तमिलनाडु कांग्रेस समिति के अध्यक्ष के सेल्वापेरुन्थगई को हराने वाले के तेन्नारासु (श्रीपेरंबुदूर सीट) को अनिवासी तमिल कल्याण विभाग सौंपा गया है। इसके अलावा, लोकेश तमिल सेल्वन (रासीपुरम सीट) को वाणिज्यिक कर और पंजीकरण विभाग तथा पी मथन राजा (ओट्टापिडारम सीट) को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग का प्रभार मिला है।
मंत्रिमंडल में महिलाओं की हिस्सेदारी में चार महिलाओं को मौका मिला है। शिवाकाशी से चुनी गईं कीर्तना को उद्योग मंत्री बनाया गया है। इनके अलावा पशुपालन मंत्री कमली, दुग्ध और डेयरी विकास मंत्री सी विजयालक्ष्मी और सामाजिक कल्याण एवं महिला सशक्तिकरण मंत्री के जगदेश्वरी शामिल हैं।
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