एसएएस नगर , मई 21 -- वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पंजाब के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर कर्मचारी विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों में कर्मचारियों और पेंशनरों में सरकार के खिलाफ गहरा असंतोष पैदा हुआ है, जिसका असर राज्य के विकास और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर पड़ेगा।
श्री सिद्धू ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि कर्मचारियों और पेंशनरों को अपनी जायज मांगों के लिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि छठे वेतन आयोग की बकाया राशि, महंगाई भत्ते की लंबित किस्तों और मेडिकल बिलों के भुगतान जैसे मामलों में सरकार अदालत के निर्देश लागू करने की बजाय पुनर्विचार याचिकाएं दायर कर कर्मचारियों के प्रति टकरावपूर्ण रवैया अपना रही है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनावों के दौरान आम आदमी पार्टी ने पुरानी पेंशन योजना लागू करने का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद सरकार ने इसे लागू नहीं किया। इसके साथ ही कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की लंबित किस्तें भी जारी नहीं की गईं।
श्री सिद्धू ने दावा किया कि पंजाब के कर्मचारियों और पेंशनरों को वर्तमान में केंद्र सरकार और हरियाणा के कर्मचारियों की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत कम महंगाई भत्ता मिल रहा है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि पंजाब एवं हरियाणा न्यायालय द्वारा लंबित महंगाई भत्ता और छठे वेतन आयोग की बकाया राशि छह प्रतिशत ब्याज सहित जारी करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद सरकार ने पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से 'तर्कहीन' याचिकाएं दायर कीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मार्कफेड ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मेडिकल भत्ता और इलाज खर्च प्रतिपूर्ति से वंचित कर अमानवीय फैसला लिया, जिसके चलते उन्हें अदालत का सहारा लेना पड़ा।
श्री सिद्धू ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कर्मचारी किसी भी सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और अन्य प्रशासनिक इकाइयां कर्मचारियों की मेहनत से चलती हैं, लेकिन भगवंत मान सरकार उन्हें समय पर उनका हक न देकर सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर राज्य का खजाना भरा होने का दावा करती है, जबकि दूसरी ओर कर्मचारियों के अधिकारों को दबाने के लिए आर्थिक संकट का बहाना बना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब की वित्तीय स्थिति के लिए कर्मचारी नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, फिजूलखर्ची और सरकार की गलत आर्थिक नीतियां जिम्मेदार हैं।
उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद है कि अपने बकाया का इंतजार करते हुए करीब 35 हजार कर्मचारी और पेंशनर दुनिया से चले गये, जो सरकार की विफलता का बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और वे स्वयं हमेशा कर्मचारियों के साथ खड़े रहे हैं और भविष्य में भी उनकी हर जायज लड़ाई में समर्थन जारी रहेगा।
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