दरभंगा , अप्रैल 26 -- बिहार के प्रतिष्ठित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर चौधरी ने रविवार को कहा कि भारतीय जीवन मूल्यों, शोध एवं प्रकाशन के प्रति उत्कंठा बनाए रखते हुए लक्षित उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए सदैव प्रयासरत रहना चाहिए। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के व्यवसाय एवं प्रबंधन विभाग के तत्वावधान में 22 अप्रैल से विश्वविद्यालय परिसर स्थित जुबली हॉल में आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. चौधरी ने कहा कि देश की बेहतरी और विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विद्यार्थी और शिक्षक दोनों को मिलकर कार्य करना होगा, जो अत्यंत आवश्यक है।
केन्द्रीय विश्वविद्यालय, रांची के पूर्व कुलपति प्रोफेसर एन. के. यादव इंदु ने भारतीय चिंतन की श्रेष्ठता एवं पाश्चात्य दर्शन से इसकी विभिन्नता को रेखांकित किया। उन्होंने धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चार पुरुषार्थों की व्याख्या करते हुए 'शुभ लाभ' की संकल्पना के साथ व्यावसायिक चिंतन अपनाने की वकालत की।
वाणिज्य एवं व्यवसाय प्रशासन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष सह निदेशक प्रो. बी. बी. एल. दास ने अपने आशीर्वादात्मक उद्बोधन में शोधार्थियों को सतत विकास की अवधारणा के साथ तालमेल बिठाते हुए पर्यावरण हितैषी नवाचार करने पर बल दिया। उन्होंने 'बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय' के मंत्र को आत्मसात करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
सत्र के आरंभ में आगत अतिथियों का प्रतीक चिन्ह से स्वागत सम्मेलन के सचिव डॉक्टर राज कुमार शाह एवं स्वागत भाषण संरक्षक प्रोफेसर एच. के सिंह ने प्रस्तुत किया। सम्मेलन के प्रतिनिधि प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किये। प्रतिवेदको के प्रतिवेदन को डॉक्टर ललित शर्मा ने प्रस्तुत किया।
सत्र का समापन कुलपति द्वारा इसी प्रकार की अकादमिक गतिविधियों के आयोजन को निरंतर जारी रखने के निर्देश के साथ हुआ।
धन्यवाद ज्ञापन सम्मेलन के समन्वयक डॉक्टर दिवाकर झा ने किया, वहीं मंच संचालन डॉक्टर निर्मला कुशवाह ने किया। गौरतलब है कि बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने इस पांच दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन किया था।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित