, May 25 -- एसीएस ने निर्देश दिए हैं कि शिविर स्थल पर आवेदन के लिए प्री-प्रिंटेड प्रोफार्मा की प्रतियां रखी जाए, जिसमें आवेदक की वैसी जानकारी ली जाए जो पोर्टल पर इंट्री के लिये आवश्यक हो और वहां आवेदन लिखने के लिये दक्ष की लिपिकों की प्रतिनियुक्ति की जाए, जिससे वैसे लोग जो आवेदन नहीं लिख सकते हैं उन्हें आवेदन दाखिल करने में कठिनाई न हो। उन्होंने कहा कि शिविर स्थलों पर इंटरनेट डोंगल के साथ लैपटॉप एवं प्रिंटर की व्यवस्था रखी जाए, जिससे आवेदन की इंट्री पोर्टल पर उसी स्थल पर करते हुए उसकी पावती आवेदक को प्राप्त हो सकें। एसीएस ने कहा है कि सहयोग शिविर में जिले के सभी सांसद, विधायक एवं जिला और प्रखंड स्तरीय कार्य समिति के सदस्यों को भी आमंत्रित किया जाए।
अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्दर ने कहा है कि राजस्व न्यायालयों में दायर मामलों का निस्तारण का कार्य बहुत धीमा है। इसे देखते हुए जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी, डीसीएलआर और अंचल अधिकारियों के न्यायालया में जितने मामले लंबित है, उनकी समीक्षा की जाए और जिन पंचायतों में आगामी शिविर प्रस्तावित है, उन पंचायतों के मामलों की लगातार सुनवाई कर उसका निष्पादन पंचायत में लगने वाले शिविर से पहले कराया जाये, जिससे शिविर के दिन संबंधित पक्षों को उसकी सूचना दी जा सकें।
एसीएस ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि गोपनीय शाखा से दूरभाष पर कुछ आवेदकों से रैंडम प्रतिक्रिया ली जाए, जिससे यह पता चल सके कि उनके मामलों का सही तरीके से निस्तारण हुआ है कि नहीं। जिन मामलों में आवेदक की शिकायत प्राप्त होती है, उसकी समीक्षा कर सही तरीके से उसका निष्पादन कराया जाए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए अनुशंसा करें।
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