जयपुर , मई 21 -- राजस्थान प्रदेश कांग्रेस ने गुरुवार को यहां राष्ट्रीय योग्यता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) पेपर लीक मामले को लेकर केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे एवं नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए ) को भंग करने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के नेतृत्व में इस प्रदर्शन में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, कांग्रेस विधायक, सांसद, विधायक प्रत्याशी, सांसद प्रत्याशी प्रदर्शन में हजारों कार्यकर्ताओं के साथ शामिल रहे। कांग्रेस कार्यकर्ता सुबह दस बजे प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय जयपुर पर एकत्रित हुए जहां श्री डोटासरा एवं श्री जूली ने सभा को सम्बोधित किया।

सभा के पश्चात् श्री डोटासरा की अगुवाई में कांग्रेस नेता एवं कार्यकर्ता जुलूस के रूप में भाजपा प्रदेश मुख्यालय का घेराव करने के लिये रवाना हुए लेकिन पुलिस ने प्रदर्शन कर कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को शहीद स्मारक पर बैरीकेट लगाकर आगे जाने से रोक दिया। जब प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने का प्रयास किया तो उन पर पानी की बौछार कर उन्हें रोका।

इस अवसर पर श्री डोटासरा ने अपने संबोधन में कहा कि नीट-2026 का पेपर लीक होने में भाजपा नेताओं की मिलीभगत पूर्ण रूप से सामने आई है तथा वर्ष 2024-2025 में भी नीट का पेपर लीक हुआ था, यह तथ्य सामने आ चुके हैं, किन्तु भाजपा की केन्द्र सरकार ने एनटीए जो यह पेपर करवाती है, के खिलाफ ना तो कोई ठोस कार्यवाही की, ना ही दोषी अधिकारियों को हटाया गया है, जबकि परीक्षा का पेपर हुबहू लीक होने के साथ बेचा गया। इस पूरे प्रकरण के लिये मोदी सरकार को केन्द्रीय शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी सुनिश्चित करते हुये शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा अविलम्ब लेना चाहिये।

उन्होंने कहा कि भाजपा की केन्द्र और प्रदेश सरकार दोनों ही पेपर लीक की जिम्मेदारी से बच नहीं सकते, क्योंकि पेपर लीक का खुलासा सर्वप्रथम राजस्थान में हुआ है।

इस अवसर पर श्री जूली ने कहा कि नीट के पेपर लगातार तीन वर्ष से लीक हो रहे हैं जो देश के लाखों छात्रों के हितों पर कुठाराघात है। भाजपा के नेता केवल दोषियों को बचाने में लगे हुये हैं, जबकि वास्तविकता में सबसे पहले कार्यवाही राजस्थान में होनी चाहिये थी, क्योंकि पेपर लीक होने की सर्वप्रथम जानकारी राजस्थान में हुई, किन्तु आश्चर्य का विषय है कि भाजपा की प्रदेश सरकार ने राजस्थान में एक भी एफआईआर दर्ज नहीं की, जो दर्शाता है कि भाजपा की सरकार किसी दोषी को बचाने के लिये ही कार्य कर रही थी।

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