वाशिंगटन , मई 21 -- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान को लेकर तनावपूर्ण बातचीत हुई है जिसमें ईरान के मुद्दे और इस संघर्ष से निपटने पर दोनों नेताओं के बीच गहरे मतभेद साफ़ नज़र आए।

जहां अमेरिका ईरानियों के साथ समझौता करने को लेकर उत्सुक था, वहीं नेतन्याहू का मानना था कि ईरान की सैन्य क्षमताओं को और कम करने और उसके महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नष्ट करके वहां की सरकार को कमज़ोर करने के लिए फिर से हमले शुरू किए जाने चाहिए।

अमेरिकी मीडिया एक्सिओस ने तीन सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इस बातचीत के बाद श्री नेतन्याहू "गुस्से से आग-बबूला" हो गये थे, जिससे ईरान के प्रति अमेरिका के रुख को लेकर उनकी नाराज़गी साफ़ ज़ाहिर होती है। इस बातचीत से पहले रविवार को भी दोनों नेताओं के बीच एक और बातचीत हुई थी, जिसमें कथित तौर पर श्री ट्रंप ने संकेत दिया था कि वह इस हफ़्ते की शुरुआत में ही ईरान पर नये लक्षित हमले करने की ओर झुक रहे हैं।

सीएनएस ने इस ऑपरेशन के बारे में रिपोर्ट दी थी इस इसका नाम बदलकर "ऑपरेशन स्लेजहैमर" रखे जाने की उम्मीद है। हालांकि एक दिन से भी कम समय बाद श्री ट्रंप ने घोषणा की कि वह मंगलवार को होने वाले नियोजित हमलों को टाल रहे हैं। उन्होंने यह फ़ैसला खाड़ी देशों के सहयोगियों (जिनमें कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं) के अनुरोध पर लिया।

अमेरिका और क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार, तब से खाड़ी देश और पाकिस्तानी मध्यस्थ, व्हाइट हाउस के साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि नए सिरे से कूटनीतिक बातचीत के लिए एक रूपरेखा तैयार की जा सके। श्री ट्रम्प ने बुधवार सुबह पत्रकारों से बात करते हुए संकेत दिया कि ईरान के साथ बातचीत एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच रही है। उन्होंने कहा, "हम ईरान के साथ बातचीत के अंतिम चरण में हैं। हम देखेंगे कि आगे क्या होता है।" उन्होंने कहा, "या तो हम कोई समझौता कर लेंगे या फिर हमें कुछ ऐसे कदम उठाने पड़ेंगे जो थोड़े अप्रिय हो सकते हैं, लेकिन उम्मीद है कि नौबत वहां तक नहीं आएगी।" बताया जा रहा है कि कूटनीतिक समझौते के प्रति श्री ट्रंप की यह उत्सुकता श्री नेतन्याहू को निराश कर रही है।

श्री नेतन्याहू लगातार इस बात के पक्ष में रहे हैं कि ईरान के प्रति एक सख़्त सैन्य रुख अपनाया जाना चाहिए। इज़रायली अधिकारियों और श्री ट्रंप प्रशासन के सूत्रों का कहना है कि श्री नेतन्याहू का मानना है कि बातचीत में होने वाली किसी भी देरी का फ़ायदा ईरान को ही मिलता है, और इससे वहां की सरकार पर पड़ने वाला दबाव कमज़ोर पड़ जाता है।

इस बार अमेरिका ईरान के साथ मतभेदों को दूर करने के लिए, क्षेत्रीय मध्यस्थों ( कतर, पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र) द्वारा तैयार किए गए मसौदा के आधार पर एक समझौता करने को तैयार है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब श्री ट्रंप, ईरान पर ज़बरदस्त हमला करने और एक कूटनीतिक समझौते का इंतज़ार करने के बीच लगातार हिचकिचा रहे हैं। श्री नेतन्याहू इन बातचीत को लेकर बहुत ज़्यादा शंकित हैं और ईरान की सैन्य क्षमताओं को और कमज़ोर करने तथा उसके अहम बुनियादी ढांचों को निशाना बनाकर वहां की सरकार को कमज़ोर करने के लिए युद्ध फिर से शुरू करना चाहते हैं।

इस बीच, घरेलू हालात से वाकिफ़ श्री ट्रंप लगातार कह रहे हैं कि उन्हें अब भी लगता है कि कोई समझौता हो सकता है, हालांकि उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि अगर बातचीत नाकाम रही तो वह युद्ध फिर से शुरू करने के लिए तैयार हैं।श्री ट्रम्प ने बुधवार को कोस्ट गार्ड अकादमी में कहा, "एक ही सवाल है: क्या हम जाकर इसे खत्म कर दें, या वे किसी दस्तावेज़ पर दस्तखत करेंगे? देखते हैं क्या होता है।" उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान समझौता करने और युद्ध फिर से शुरू करने के बीच "बिल्कुल सीमा रेखा पर" खड़े हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार श्री ट्रंप यह भी चाहते हैं कि नेतन्याहू इस कूटनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बने रहें और हमले फिर से शुरू करने से बचें। श्री ट्रंप ने कहा कि ईरान के मामले में नेतन्याहू "वही करेंगे जो मैं उनसे करवाना चाहूंगा।" हालांकि उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि दोनों के बीच अच्छे संबंध हैं। उधर ईरान ने इस बात की पुष्टि की है कि वह एक नए प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है, हालांकि उसने अभी तक लचीलेपन के कोई खास संकेत नहीं दिखाये हैं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित