नई दिल्ली, मई 24 -- आज 24 मई 2026 के सुबह का सुविचार हमें याद दिला रहा है कि प्रयास तभी सार्थक होते हैं, जब वे सही समय पर, सही जगह पर और सही व्यक्ति के लिए किए जाएं। बिना सोचे-समझे किया गया काम कितना भी अच्छा क्यों ना हो, वह अक्सर व्यर्थ चला जाता है। चाणक्य नीति में एक महत्वपूर्ण श्लोक है:वृथा वृष्टिः समुद्रेषु वृथा तृप्तेषु भोजनम्।वृथा दानं धनाढ्येषु वृथा दीपो दिवापि च॥ समुद्र में वर्षा करना व्यर्थ है, पेट भरे व्यक्ति को भोजन कराना व्यर्थ है, धनी व्यक्ति को दान देना व्यर्थ है और दिन में दीपक जलाना भी व्यर्थ है। चाणक्य जी इस श्लोक के माध्यम से हमें एक महत्वपूर्ण सबक सिखाते हैं कि कोई भी कार्य कितना भी अच्छा क्यों ना हो, अगर वह सही समय, सही स्थान और सही व्यक्ति के लिए नहीं किया गया, तो उसका कोई फल नहीं मिलता है।श्लोक का अर्थ आचार्य चाणक्य ...