हरिद्वार, मई 24 -- देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीकी विकास के साथ ही मानव सभ्यता के भविष्य को दिशा देने वाली शक्ति बन चुकी है। यदि एआई को मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना के साथ जोड़ा जाए तो यह विश्व में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन सकती है। डॉ. चिन्मय पंड्या ने बिहार के पटना में शिक्षा, प्रशासन, प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को संबोधित करते हुए कहा कि आज की पीढ़ी तकनीक के माध्यम से विश्व को बदलने की क्षमता रखती है, लेकिन इसके साथ आत्मसंयम, विवेक और सामाजिक उत्तरदायित्व भी उतना ही आवश्यक है। देसंविवि का उद्देश्य कुशल पेशेवर के साथ ही ऐसे जागरूक नागरिक तैयार करना है जो धर्म, संस्कृति और विज्ञान के संतुलन को समझते हो...