क्लेश मन की स्वाभाविक शांति व संतुलन को कर देता है भंग : आचार्य विश्वदेवानंद
बोकारो, मई 24 -- बोकारो, प्रतिनिधि। आनन्द नगर में चल रहे तीन दिवसीय धर्म महासम्मेलन के दूसरे दिन प्रातःकालीन सत्र में आनन्द मार्ग प्रचारक संघ के पुरोधा प्रमुख आचार्य विश्वदेवानन्द अवधूत ने उपस्थित साधकों एवं भक्तों को संबोधित किया। पुरोधा प्रमुख ने "ईश्वर और जीव" विषय की व्याख्या करते हुए कहा कि परमपुरुष क्लेश, कर्म, विपाक और आशय से सर्वथा परे हैं। उन्होंने योगदर्शन के सूत्र क्लेश-कर्म-विपाकाशयैरपरामृष्टः पुरुषविशेष ईश्वरः का उल्लेख करते हुए कहा कि ईश्वर अथवा परमपुरुष वह पुरुषविशेष सत्ता है जो क्लेश (मानसिक विकार), कर्म (क्रिया), विपाक (कर्मफल) तथा आशय (संस्कारों के बीज) से कभी प्रभावित नहीं होती। इसके विपरीत संसार का प्रत्येक जीव इन बंधनों के प्रभाव में रहता है। अपने प्रवचन में उन्होंने स्पष्ट किया कि क्लेश वह तत्व है जो मन की स्वाभाविक ...
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