आठ दिन तक ठंडा भोजन, शीतला माता की होती है आराधना
कोडरमा, मार्च 2 -- झुमरी तिलैया, निज प्रतिनिधि। होली का नाम आते ही रंग, उमंग और स्वादिष्ट पकवानों की तस्वीर सामने आ जाती है, लेकिन मारवाड़ी समाज में यह पर्व एक अलग ही श्रद्धा, अनुशासन और परंपरा के साथ मनाया जाता है। यहां होलिका दहन के बाद होली के दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता। इतना ही नहीं, इसके बाद पूरे आठ दिनों तक तले-भुने व्यंजन बनाना वर्जित रहता है और घरों में ठंडा या पहले से तैयार भोजन ही ग्रहण किया जाता है। समाज की मान्यता के अनुसार होलिका दहन के दिन ही सभी आवश्यक पकवान बना लिए जाते हैं। यही भोजन होली के दिन से लेकर शीतला माता की पूजा तक किया जाता है। इस अवधि में यदि कुछ पकाया भी जाता है तो वह अत्यंत सादा होता है - बिना तेल और बिना तड़के का। इस परंपरा का सीधा संबंध शीतला माता की आराधना से जुड़ा हुआ है। होली के आठ दिन बाद शीतला माता की ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.